दर्द का रास्ता छोड़ कर मंजिलों से हमने कहा थोडा दूर चली जाये, रास्ता कम लगता है हमारे पैरों को चलने के लिए...

Sunday, November 22, 2009

मन कहता है .........


फोटो एडिटेड -ज्योति
ऐसे तो नही थे हम जैसे रहने लगे है

तन्हाई से थी दोस्ती हमारी अब उससे ही डरने लगे,

रुकना नही चाहते थे किसी के लिए ,

बस यूँ ही रुक कर किसी का इंतज़ार करने लगे ,

छूना चाहते है आसमान पर किसी की चाहत की में डूबने लगे,

हमको पता है इन रास्तो की नही है मंजिल,

सच्चाई को रास्ते में छोड़ कर आगे बढ़ने लगे,

यादों के कारवां को तकिया बनाकर सोने लगे,

शायद तुम कभी न समझ पाओगे हमे,

हम तो बस तेरे रंग में रंगने लगे,

दुनिया की सारी खुशिया तेरे लिए ,

हम तो अब तेरे संग जीने लगे।


20 comments:

  1. यादों के कारवां को तकिया बनाकर सोने लगे,


    शायद तुम कभी न समझ पाओगे हमे,


    हम तो बस तेरे रंग में रंगने लगे,

    waah bahut khub,sunder ehsaaon se bhari rachana.

    ReplyDelete
  2. रुकना नही चाहते थे किसी के लिए ,
    बस यूँ ही रुक कर किसी का इंतज़ार करने लगे ,

    मुड कर ताकना ठीक नहीं बार बार ..तू कदम से कदम मिला ले तो साथ चलूँ ...कुछ गलत कहा मैंने ..??

    ReplyDelete
  3. nahi ji bilkul sahi kaha apne. thanks

    ReplyDelete
  4. दिल से लिखी हुई रचना
    अच्छा लिखती हैं आप

    ReplyDelete
  5. मन के ख्यालों को अच्छे शब्द दिये आपने

    ReplyDelete
  6. तन्हाई से थी दोस्ती हमारी अब उससे ही डरने लगे...sundar panktiyan hain..

    ReplyDelete
  7. aaakhiri ki panktiyon ne dil chhoo liya....
    aisa laga ki bahut dil se likha hai...yeh shabd ...shabd nahin hain...dil ki awaaz hai...

    mere andar tak yeh kavita utar gayi....

    bahut hi behtareen shabdon ke saath bahut hi behtareen kavita.....

    ReplyDelete
  8. VERY VERY NICE BLOG.......and nice thinking..

    ReplyDelete
  9. अच्छे भाव हैं

    ReplyDelete
  10. लाजवाब पंक्तियाँ
    बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com
    Email- sanjay.kumar940@gmail.com

    ReplyDelete
  11. ek dil ki baat jo ek dilwaala/dilwaali hi samjh sake. bahut sundar.

    ReplyDelete
  12. "हमको पता है इन रास्तो की नही है मंजिल,
    सच्चाई को रास्ते में छोड़ कर आगे बढ़ने लगे,
    यादों के कारवां को तकिया बनाकर सोने लगे,
    शायद तुम कभी न समझ पाओगे हमे,
    हम तो बस तेरे रंग में रंगने लगे,
    दुनिया की सारी खुशिया तेरे लिए ,
    हम तो अब तेरे संग जीने लगे। "

    लगता है, ये तो आपने सच्चाई सीधे सीधे कह दी.

    आपके इस ब्लॉग पर आना मन को आनंदित कर गया.

    ReplyDelete
  13. हमको पता है इन रास्तो की नही है मंजिल,


    सच्चाई को रास्ते में छोड़ कर आगे बढ़ने लगे,


    यादों के कारवां को तकिया बनाकर सोने लगे,


    शायद तुम कभी न समझ पाओगे हमे,


    हम तो बस तेरे रंग में रंगने लगे,


    दुनिया की सारी खुशिया तेरे लिए ,


    हम तो अब तेरे संग जीने लगे।

    ye lines bahut acchi hai

    ReplyDelete
  14. Itni tareef ki ja chuki hai ki mera kuch kahna repetition lagega. Fir bhi, dil ke kafi kareeb gayi aapki ye kavita...behad nazuk aur behad roohani...shabd-shabd shringar hain...

    ReplyDelete
  15. shukriya jyoti ji.
    aapka hi asar hai jo maa ko itni kareeb se dekhne ka man kiya..

    ReplyDelete
  16. Sare dukh nahin, sari khushiyon ki haqdar hain aap. Har koi aisi nayab soch nahi rakhta...

    ReplyDelete
  17. हमको पता है इन रास्तो की नही है मंजिल,
    सच्चाई को रास्ते में छोड़ कर आगे बढ़ने लगे,
    waah...bahut hi sundar likha hai aapne

    ReplyDelete
  18. badiya aapki ek aur behatrin rachna mujhe comment karne ke liye thanx

    ReplyDelete
  19. बेहतरीन ब्लॉग.. खूबसूरत ख्याल

    ReplyDelete