दर्द का रास्ता छोड़ कर मंजिलों से हमने कहा थोडा दूर चली जाये, रास्ता कम लगता है हमारे पैरों को चलने के लिए...

Monday, October 19, 2009

क्या हमको जीना आता है

शायद नही............

क्यों ?

क्योंकि हमको मरने से डर लगता है इसीलिए हमको जीना नही आता। हम बस अपनी ज़िन्दगी को काट रहे है किसी भार की तरह। आज, कल , परसों , और बरसों बस जी रहे है। हमने क्या हालत बना ली है अपनी ? इतनी लापरवाही क्यों कर रहे है समझ से बाहर है। आज जो है वह कल नही होगा इसीलिए आज में जी लो? पता है आपको सब पता है पर उस पते का क्या पता जो ज़िन्दगी से लापता हो। कहने का मतलब सिर्फ़ इतना है ज़िन्दगी सुंदर कार है जो कुछ साल बाद आउट हो जायेगी उसकी जगह नई एडवांस कार आ जायेगी। तो जल्दी कीजिए ऑफर कुछ समय के लिए ही है कैश कर लीजिये नही तो आप को पछताना पड़ेगा। हमको सिर्फ़ इतना पता होना चाहिए की हम जिंदा है तो सिर्फ़ आज भर के लिए, कल तो मरना है। ज़िन्दगी का हर लम्हा बड़े सुन्दरता के साथ जीना ही अपना अंदाज़ है

14 comments:

  1. आप सौभाग्यशाली मित्रों का स्वागत करते हुए मैं बहुत ही गौरवान्वित हूँ कि आपने ब्लॉग जगत मेंपदार्पण किया है. आप ब्लॉग जगत को अपने सार्थक लेखन कार्य से आलोकित करेंगे. इसी आशा के साथ आपको बधाई.
    ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं,
    http://lalitdotcom.blogspot.com
    http://lalitvani.blogspot.com
    http://shilpkarkemukhse.blogspot.com
    http://ekloharki.blogspot.com
    http://adahakegoth.blogspot.com

    ReplyDelete
  2. na tha kuchh to khuda tha,
    kuchh na hota to kuda hota,
    duboya mujhko hone ne
    na hota gar to kya hota.

    ReplyDelete
  3. बधाई हो, आपने बहुत अच्‍छा लिखा है।

    सुनील पाण्‍डेय

    इलाहाबाद।

    09953090154

    ReplyDelete
  4. आपने लेख का शीर्षक वाला कॉलम बंद कर रखा है इसलिये आपके लेख सीधे पहले पैरा से शुरु हो रहे हैं। आप Dasha Board में जाकर Formatting - Show Title Field में No को Yes करदें, और पोस्ट एडिटर में जाकर अपनी पुरानी पोस्ट को शीर्षक दे दें।
    धन्यवाद।
    ॥दस्तक॥|
    गीतों की महफिल|
    तकनीकी दस्तक

    ReplyDelete
  5. पता है आपको सब पता है पर उस पते का क्या पता जो ज़िन्दगी से लापता हो। --YE PANKTI BAHUT ACHHI LAGI

    ReplyDelete
  6. dilchasp hai aapka zindagi ka falsafa...

    ReplyDelete
  7. चिटठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लेखन के द्वारा बहुत कुछ सार्थक करें, मेरी शुभकामनाएं.
    .
    ---
    तीन कहानियां: "friends with benefits" रिश्ते के अनुभव- बहस-७ [उल्टा तीर]

    ReplyDelete
  8. आपका लेख पड्कर अछ्छा लगा, हिन्दी ब्लागिंग में आपका हार्दिक स्वागत है, मेरे ब्लाग पर आपकी राय का स्वागत है, क्रपया आईये

    http://dilli6in.blogspot.com/

    मेरी शुभकामनाएं
    चारुल शुक्ल
    http://www.twitter.com/charulshukla

    ReplyDelete
  9. It is good to see your comments on the philosophy of life

    ReplyDelete
  10. Speech given by Chetan Bhagat in Symbiosis ...must read.....

    "Life is one of those races in nursery school where you have to run with a marble in a spoon kept in your mouth. If the marble falls, there is no point coming first. Same with life, where health and relationships are the marble.. Your striving is only worth it if there is harmony in your life. Else, you may achieve the success, but this spark, this feeling of being excited and alive, will start to die.

    One thing about nurturing the spark - don't take life seriously. Life is not to be taken seriously, as we are really temporary here. We are like a pre-paid card with limited validity. If we are lucky, we may last another 50 years. And 50 years is just 2,500 weekends. Do we really need to get so worked up?

    It's ok, bunk a few classes, goof up a few interviews, take leave from
    work, fall in love. We are people, not programmed devices........." :)

    "Don't be serious, be sincere.”!

    Start Enjoying Life from this moment on................

    ReplyDelete