दर्द का रास्ता छोड़ कर मंजिलों से हमने कहा थोडा दूर चली जाये, रास्ता कम लगता है हमारे पैरों को चलने के लिए...

Thursday, October 22, 2009


सच कहने को हम हमेशा तैयार है। हमको १८ सालों में जितना अनुभव उतना किसी को नही है। हमने पत्रकारिता को नए आयाम दिए है। हम है राष्ट्रीय सहारा। हमने सोचा की चलो हम सबसे पूछे की हम क्या अपने पेपर में बदलाव ला सकते जो इसके पुरे रूप को बदल दे और ये नम्बर १ बन जाए। हम चाहते है की लोगो का विश्वास हम जीत ले ताकि लोगो को सच्चाई का पता चल सके। हम इतना अटूट विश्वास बनाना चाहते है जो कभी टूटे नही। लेकिन मेरा दिल कहता है एक दिन ज़रूर आयेगा जब हम नम्बर १ हो जायेंगे।

Monday, October 19, 2009

क्या हमको जीना आता है

शायद नही............

क्यों ?

क्योंकि हमको मरने से डर लगता है इसीलिए हमको जीना नही आता। हम बस अपनी ज़िन्दगी को काट रहे है किसी भार की तरह। आज, कल , परसों , और बरसों बस जी रहे है। हमने क्या हालत बना ली है अपनी ? इतनी लापरवाही क्यों कर रहे है समझ से बाहर है। आज जो है वह कल नही होगा इसीलिए आज में जी लो? पता है आपको सब पता है पर उस पते का क्या पता जो ज़िन्दगी से लापता हो। कहने का मतलब सिर्फ़ इतना है ज़िन्दगी सुंदर कार है जो कुछ साल बाद आउट हो जायेगी उसकी जगह नई एडवांस कार आ जायेगी। तो जल्दी कीजिए ऑफर कुछ समय के लिए ही है कैश कर लीजिये नही तो आप को पछताना पड़ेगा। हमको सिर्फ़ इतना पता होना चाहिए की हम जिंदा है तो सिर्फ़ आज भर के लिए, कल तो मरना है। ज़िन्दगी का हर लम्हा बड़े सुन्दरता के साथ जीना ही अपना अंदाज़ है

Tuesday, September 29, 2009

चलो हम भूला देंगे तुम्हारे सितम
अब कभी नही चाहेंगे तुमको सनम
सोचा जो तुम न थे
तुमने तो अपना रूप दिखा दिया
हमको जीवन का मतलब सिखा दिया
अब तुम्हारा मेरी ज़िन्दगी में कोई अक्स नही
न हो साथ तो कोई गम नही
तुमको लेकर हम परेशान ना होंगे हम
तुम उस रास्ते तो उस रास्ते ना जायेंगे हम
कहते की इतना मत तंग करो की डोर टूट जाए
वोह डोर अब टूट गई है।

Friday, September 11, 2009

तो लगता है हम और अकेले हो गए है। इतने अकेले की ज़िन्दगी बकवास लगती है। हम इतने भावुक क्यूँ है। शायद ज़िन्दगी के साथ हमने खिलवाड़ किया है उसी की सज़ा हमे मिली है। हमने हमेशा ग़लत किया सबको दुःख दिया है। अब ज़िन्दगी बोझ बन गई है जीने का मन नही करता है। हमको हमेशा एक बड़ी चीज़ की कमी खलती है जो अब शायद कभी पूरी नही हो सकती। हमे हमारे जज़बातों से नफरत सी हो गई है। वक्त के साथ मंजिल बदल गई है। अब कुछ नही चाहिए हमे सिवाय ................................
हर लड़की अपनी ज़िन्दगी जीना चाहती है।
कुछ कम कुछ और कम माँगती है।
हर कोई लिखता है उसके ऊपर,
हर श्ख्क्स सोचता है उसके लिया,
तो कौन बेबस बनता है उसको।

कभी कभी औरत के ऊपर पढ़ पढ़ कर जी दुखी हो जाता है। न जाने कितना लिखा पढ़ा गया होगा उसके ऊपर पर क्या सच में कोई उसको पहचान पाया है। अजीब पहेली है यह औरत। वोह न दुखी है न परेशान । हारी है ख़ुद से तो किसी को दोषी क्या बनाना।

Thursday, September 10, 2009

kuch kam hai

hum ko humesha lagta hai kuch kam hai. sab kuch hai par kuch kam hai. yahi sochate sochate itna safar tay kar liya hai, aage bhi yahi haal rehega. kitni bhi kamyabi mil jaye par kam lagti hai. humara man kitana asantoshi hai. kabhi zindagi me kuch behatar 2 din se zyada nahi lagta hai. kabhi kud se sawal karte hai hum ki kitni bhookh hai humare andar.













जे गणेश